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Bihar NH Projects Update: पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे सहित 6 बड़ी सड़क योजनाएं कैबिनेट मंजूरी में अटकी
- Reporter 12
- 20 Apr, 2026
बिहार की 6 बड़ी राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं केंद्रीय कैबिनेट मंजूरी के अभाव में अटकी हैं। 51 हजार करोड़ रुपये की योजनाओं में पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे भी शामिल है।
पटना/आलम की खबर:बिहार में सड़क और बुनियादी ढांचे के विकास को गति देने वाली कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं फिलहाल केंद्र सरकार की अंतिम मंजूरी के अभाव में अटकी हुई हैं। लगभग 51 हजार करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली इन योजनाओं को वित्तीय स्वीकृति तो मिल चुकी है, लेकिन केंद्रीय कैबिनेट से अंतिम मंजूरी न मिलने के कारण ये परियोजनाएं फाइलों में ही अटकी पड़ी हैं और जमीन पर काम शुरू नहीं हो पा रहा है।
इन परियोजनाओं में सबसे अहम राज्य का पहला एक्सप्रेस-वे पटना से पूर्णिया के बीच प्रस्तावित 244.96 किलोमीटर लंबा मार्ग शामिल है, जिसे बिहार के सड़क नेटवर्क में एक गेमचेंजर माना जा रहा है।
कैबिनेट मंजूरी की कमी से अटकी प्रगति
सूत्रों के अनुसार इन सभी परियोजनाओं को आर्थिक कार्य विभाग के तहत पीपीपीएसी (Public Private Partnership Appraisal Committee) से मंजूरी मिल चुकी है और इन्हें हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) पर विकसित करने की सिफारिश भी की गई है। इस मॉडल के तहत निर्माण एजेंसी 60 प्रतिशत लागत वहन करती है, जबकि 40 प्रतिशत खर्च सरकार द्वारा दिया जाता है और बाद में एजेंसी टोल के माध्यम से अपनी लागत की भरपाई करती है।
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लेकिन इन परियोजनाओं की वास्तविक शुरुआत तब तक संभव नहीं है जब तक केंद्रीय कैबिनेट से अंतिम स्वीकृति नहीं मिल जाती और जमीन अधिग्रहण (3D प्रक्रिया) पूरी नहीं होती।
पटना–पूर्णिया एक्सप्रेस-वे सबसे बड़ा प्रोजेक्ट
इन परियोजनाओं में सबसे महत्वपूर्ण पटना–पूर्णिया एक्सप्रेस-वे है, जिसकी लंबाई लगभग 244.96 किलोमीटर है और इस पर करीब 31,987 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। यह एक्सप्रेस-वे राज्य का पहला फुल एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे होगा।
इसके बनने से पटना और पूर्णिया के बीच यात्रा समय लगभग 7–8 घंटे से घटकर सिर्फ 3 घंटे रह जाएगा। इससे उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच व्यापार, परिवहन और आर्थिक गतिविधियों को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।
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अनीसाबाद–दीदारगंज एलिवेटेड रोड प्रोजेक्ट
पटना शहर में ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए अनीसाबाद से दीदारगंज के बीच 13.41 किलोमीटर लंबा छह लेन एलिवेटेड रोड प्रस्तावित है। इस परियोजना की लागत लगभग 8,455 करोड़ रुपये है।
इस रोड के बनने से राजधानी पटना में भारी जाम की समस्या में राहत मिलेगी और राष्ट्रीय राजमार्गों से शहर की कनेक्टिविटी बेहतर होगी। यह प्रोजेक्ट शहरी यातायात सुधार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
वाराणसी–रांची–कोलकाता कॉरिडोर
तीसरी प्रमुख परियोजना वाराणसी–रांची–कोलकाता आर्थिक कॉरिडोर का हिस्सा है, जिसके तहत 41.95 किलोमीटर लंबे पैकेज को मंजूरी मिली है। इस पर लगभग 2,897 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे और इसमें सोन नदी पर एक महत्वपूर्ण पुल का निर्माण भी शामिल है।
इस कॉरिडोर के बनने से वाराणसी से कोलकाता की यात्रा लगभग 7 घंटे में पूरी हो सकेगी और पूर्वी भारत में माल परिवहन की गति काफी बढ़ जाएगी।
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जमीन अधिग्रहण सबसे बड़ी चुनौती
इन सभी परियोजनाओं के सामने सबसे बड़ी समस्या जमीन अधिग्रहण की धीमी प्रक्रिया है। कई स्थानों पर जमीन के अधिग्रहण को लेकर स्थानीय स्तर पर अड़चनें बनी हुई हैं, जिससे परियोजनाओं की गति प्रभावित हो रही है।
इसके अलावा विभागों के बीच समन्वय की कमी और फाइलों के स्तर पर धीमी प्रक्रिया भी इन परियोजनाओं के विलंब का कारण बन रही है।
कैबिनेट मंजूरी के बाद तेज होगी रफ्तार
अधिकारियों का मानना है कि जैसे ही केंद्रीय कैबिनेट से अंतिम मंजूरी मिल जाएगी, इन सभी परियोजनाओं पर तेजी से काम शुरू किया जाएगा। निर्माण एजेंसियां पहले से ही चयनित हैं और तकनीकी तैयारी भी लगभग पूरी है।
सरकार का लक्ष्य है कि इन परियोजनाओं के माध्यम से बिहार को देश के प्रमुख सड़क नेटवर्क से बेहतर तरीके से जोड़ा जाए और राज्य में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाए।
निष्कर्ष
बिहार की ये छह बड़ी राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं राज्य के विकास की रीढ़ मानी जा रही हैं, लेकिन फिलहाल कैबिनेट मंजूरी और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में देरी के कारण ये फाइलों में ही अटकी हुई हैं। अगर ये परियोजनाएं समय पर पूरी होती हैं तो बिहार के परिवहन, व्यापार और उद्योग क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
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